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Lesson Transcript

शिवाजी भोंसले
मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी भोंसले का जन्म 1630 में उस समय हुआ था जब भारत पर मुगलों का शासन था| एक प्रतिबद्ध हिंदू जो अन्य धर्मों का भी सम्मान करते थे और उन्हें संरक्षण देते थे, शिवाजी को "हिंदू लोगों के स्व-शासन" हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना का श्रेय दिया जाता है| इसके बावजूद कि उन्होंने मुस्लिम मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, शिवाजी ने अपने प्रदेशों में मुस्लिम इबादत स्थलों की रक्षा की और अपनी सेना में मुस्लिम जनरलों पर भरोसा किया| हिंदू और सूफी दोनों प्रकार के संतों के साथ परामर्श करना उनके लिए असामान्य नहीं था| वे अपनी सैन्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं; 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने पुणे में बीजापुर राज्य के टोरना किले पर कब्जा कर लिया, अधिक बड़े और भारी सशस्त्र दुश्मनों के खिलाफ इलाके, गति और गोपनीयता की स्थानीय जानकारी का लाभ लेने के लिए उन्होंने छापामार युद्ध की रणनीति विकसित की|
शिवाजी के शासन के तहत एक मंत्रिमंडल की अवधारणा स्थापित की गयी जिसमें राज्य की जिम्मेदारियां आठ अलग-अलग मंत्रियों; एक वज़ीर या उप-शासक, एक लेखा परीक्षक, एक शाही दस्तावेजकार और समारोह के विशेषज्ञ, शाही संवाददाता, विदेशी मामलों के मंत्री, सैन्य सलाहकार, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक सलाहकार और न्यायिक सलाहकार के बीच बाँट दी गयीं| प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत को बढ़ावा देने वाले शिवाजी ने एक नई मिसाल कायम की जब उन्होंने अपने दरबार की भाषा मराठी के रूप में स्थापित की जो मुगलों के फ़ारसी भाषा पर आधारित दरबारों के विपरीत थी| उन्होंने अपने शासन के तहत अल्पसंख्यकों की रक्षा की, दासत्व को गैरकानूनी घोषित किया और धर्म की स्वतंत्रता का समर्थन किया| महिलाओं के लिए उनके मन में काफी सम्मान था और उन्होंने जबरदस्ती धर्मांतरण का विरोध किया था|
1680 के अप्रैल महीने में शिवाजी का निधन हो गया और उनका उत्तराधिकार उनके बेटे संभाजी ने संभाला| हिंदू राष्ट्र के जनक शिवाजी को भारतीय स्कूली पुस्तकों में काफी उच्च दर्जा दिया जाता है और ब्रिटिश राज के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होने एक अग्रणी भूमिका निभाई थी| भारत के एक रूढ़िवादी हिंदू-कट्टरपंथी राजनीतिक दल ने स्वयं का नामकरण शिवाजी के नाम पर किया है, और स्वयं को "शिवसेना" (शिव की सेना) कहलाती है|

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शिवाजी भोंसले

मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी भोंसले का जन्म 1630 में उस समय हुआ था जब भारत पर मुगलों का शासन था| एक प्रतिबद्ध हिंदू जो अन्य धर्मों का भी सम्मान करते थे और उन्हें संरक्षण देते थे, शिवाजी को "हिंदू लोगों के स्व-शासन" हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना का श्रेय दिया जाता है| इसके बावजूद कि उन्होंने मुस्लिम मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, शिवाजी ने अपने प्रदेशों में मुस्लिम इबादत स्थलों की रक्षा की और अपनी सेना में मुस्लिम जनरलों पर भरोसा किया| हिंदू और सूफी दोनों प्रकार के संतों के साथ परामर्श करना उनके लिए असामान्य नहीं था| वे अपनी सैन्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं; 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने पुणे में बीजापुर राज्य के टोरना किले पर कब्जा कर लिया, अधिक बड़े और भारी सशस्त्र दुश्मनों के खिलाफ इलाके, गति और गोपनीयता की स्थानीय जानकारी का लाभ लेने के लिए उन्होंने छापामार युद्ध की रणनीति विकसित की|
 
शिवाजी के शासन के तहत एक मंत्रिमंडल की अवधारणा स्थापित की गयी जिसमें राज्य की जिम्मेदारियां आठ अलग-अलग मंत्रियों; एक वज़ीर या उप-शासक, एक लेखा परीक्षक, एक शाही दस्तावेजकार और समारोह के विशेषज्ञ, शाही संवाददाता, विदेशी मामलों के मंत्री, सैन्य सलाहकार, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक सलाहकार और न्यायिक सलाहकार के बीच बाँट दी गयीं| प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत को बढ़ावा देने वाले शिवाजी ने एक नई मिसाल कायम की जब उन्होंने अपने दरबार की भाषा मराठी के रूप में स्थापित की जो मुगलों के फ़ारसी भाषा पर आधारित दरबारों के विपरीत थी| उन्होंने अपने शासन के तहत अल्पसंख्यकों की रक्षा की, दासत्व को गैरकानूनी घोषित किया और धर्म की स्वतंत्रता का समर्थन किया| महिलाओं के लिए उनके मन में काफी सम्मान था और उन्होंने जबरदस्ती धर्मांतरण का विरोध किया था|
 
1680 के अप्रैल महीने में शिवाजी का निधन हो गया और उनका उत्तराधिकार उनके बेटे संभाजी ने संभाला| हिंदू राष्ट्र के जनक शिवाजी को भारतीय स्कूली पुस्तकों में काफी उच्च दर्जा दिया जाता है और ब्रिटिश राज के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होने एक अग्रणी भूमिका निभाई थी| भारत के एक रूढ़िवादी हिंदू-कट्टरपंथी राजनीतिक दल ने स्वयं का नामकरण शिवाजी के नाम पर किया है, और स्वयं को "शिवसेना" (शिव की सेना) कहलाती है|