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Lesson Transcript

गुजरात
सारी सृष्टि साबरमती के तट पर बसे गुजरात प्रदेश की ऋणी है जहाँ पर बापू जैसे अनमोल रतन का जन्म हुआ। जिन्होने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को अंग्रेज़ो से आज़ादी दिलाई। गाँधीजी ने सबको सत्य और अहिंसा पर चलने का मार्ग दिखलाया और गाँधीजी के सत्य के प्रयोग को दर्शाती हास्य प्रदान फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' से प्रेरित होकर वर्तमान में एक बार फिर हम लोग गाँधीवादी नीति अपना रहे हैं।
गाँधीजी को रंग-बिरंगी पतंगें बहुत पसंद थीं जो कि इस राज्य की विशेषता है। यहा पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित किया जाता है। पूरे संसार से पतंगबाज आकर पतंग का प्रदर्शन दिखाते हैं व पतंग बाजी करते हैं। एक ही डोर पर एक सो पचास से भी ज़्यादा पतंग आसमान मे उड़ाते हैं। इस त्योहार को मकर संक्रांति कहते हैं जिसे 14 जनवरी को मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठकर सहपारिवार छत पर नाश्ता बना कर ले जाते हैं और सुबह से लपेट, वो कपियो की आवाजो की गूँज आने लगती है। आसमान मे ही एक दूसरे की पतंग काटते हैं। आसमान मे नज़ारा देखने लायक होता है। पूरा आसमान रंग बिरंगी पतंगो से भर जाता है जो नये साल का प्रारंभ उमंग से भर देता है। यह नज़ारा मन मोह लेने वाला होता है। ग़रीब से अमीर तक मर्यादित पैसों मे इस पर्व का आंनद लेते हैं। इस दिन तिल के लड्डू व गजक बनाई जाती है और एक बहुत ही खास सब्जी बनाई जाती है जिसका नाम है ‘ उँधियू ’। यह मिश्रित सब्जी होती है जिसमे 40-50 सब्जिया सम्मिलित की जाती हैं। रात को भी पतंग का आनंद लिया जाता है। सूर्यास्त के बाद पतंग के साथ मोमबत्ती लगाकर उड़ाया जाता है जिसका अपना एक विशेष आकर्षण होता है।
कई लोग पतंग उड़ाने को शुभ मानते हैं और दूर उड़ती पतंग को देखने से और पतंग उड़ाने से आँखो का व्यायाम होता है व स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

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Thursday at 06:30 PM
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गुजरात

सारी स्रष्टी साबरमती के तट पर बसे गुजरात प्रदेश की ऋणी है जहा पर बापू जैसे  अनमोल रतन का जन्म हुआ। जिन्होने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को अंग्रेज़ो से आज़ादी दिलाई। गाँधीजी ने सबको सत्य और अहिंसा पर चलने का मार्ग दिखलाया और गाँधीजी के सत्य के प्रयोग को दर्शाती हास्य प्रदान फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' से प्रेरित होकर वर्तमान मे एक बार फिर हम लोग गाँधीवादी नीति अपना रहे है।
गाँधीजी को रंग-बिरंगी पतंगें बहुत पसंद थीं जो कि इस राज्य की विशेषता है। यहा पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित किया जाता है। पूरे संसार से पतंगबाज आकर पतंग का प्रदर्शन दिखाते है व पतंग बाजी करते है। एक ही डोर पर एक सो पचास से भी ज़्यादा पतंग आसमान मे उड़ाते है। इस त्योहार को मकर संक्रांति कहते हैं जिसे 14 जनवरी को मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठकर सहपारिवार छत पर नाश्ता बना कर ले जाते है और सुबह से लपेट, वो कपियो की आवाजो की गूँज आने लगती है। आसमान मे ही एक दूसरे की पतंग काटते है। आसमान मे नज़ारा देखने लायक होता है। पूरा आसमान रंग बिरंगी पतंगो से भर जाता है जो नये साल का प्रारंभ उमंग से भर देता है। यह नज़ारा मन मोह लेने वाला होता है। ग़रीब से अमीर तक मर्यादित पैसों मे इस पर्व का आंनद लेते है। इस दिन तिल के लड्डू व गजक बनाई जाती है और एक बहुत ही खास सब्जी बनाई जाती है जिसका नाम है ‘ उँधियू ’। यह मिश्रित सब्जी होती है जिसमे 40-50 सब्जिया सम्मिलित की जाती है। रात को भी पतंग का आनंद लिया जाता है। सूर्यास्त के बाद पतंग के साथ मोमबत्ती लगाकर उड़ाया जाता है जिसका अपना एक विशेष आकर्षण होता है।
कई लोग पतंग उड़ाने को शुभ मानते है और दूर उड़ती पतंग को देखने से और पतंग उड़ाने से आँखो का व्यायाम होता है व स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।