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Lesson Transcript

जैसलमेर
जैसलमेर का परिचय थार मरुस्थल के इतिहास मे अत्यंत प्राचीन रहा है। सूरज की स्वर्ण किरणें जब जैसलमेर की रेत पर गिरती हैं तो एक स्वर्गिक सुख का अनुभव देती हैं। बहती हवा के साथ जब रेतीले टीले अपनी जगह बदलते हैं तो एसा प्रतीत होता है मानो सौंदर्य के साथ सोना पिघल रहा हो। मरुस्थल में चलने वाले राहगीरों को यहाँ कुद्रत के अनेक करिश्मो में से एक ‘मृग मरीचिका’ प्रभाव यहाँ देखने को मिलता है। जो एक अनुखा अनुभव है।
पूर्णिमा के दिन जनवरी या फ़रवरी के माह में 'मरुस्थल मेला' लगता है। इस मेले का सभी राजस्थानियों को पूरे साल इंतज़ार रहता है। जहा पर रोमांचक ऊंट नृत्य, ऊंट दौड़, ऊंट कलाबाजी, ऊंट सजावट प्रतियोगिता, पगड़ी बाँधने की प्रतियोगिता एवं श्री डेजर्ट प्रतियोगिता का समावेश होता है। यह रेत पर एक सच दिखाना होता है। एक ध्वनि और प्रकाश तमाशा का आयोजन किया जाता है जिसमे लोक कलाकार पूर्णिमा की रात सैम रेत टीलो पर शानदार प्रदर्शन करते हैं। निश्चित रूप से इस घटना को देखना न चूके।
यहाँ सोनार महल है जो एक मात्र जीवित महल है मतलब यहाँ पर आज भी लोग वैसे ही रहते हैं जेसे वो पुराने जमाने मे रहा करते थे। रेतीले टीलो के बीच, ऊंट पर बैठकर एक जगह से दूसरी जगह तक जाते हैं। रात के समय मे बिना रोशनी के जाते हैं और सिर्फ़ चाँद और तारो की स्थिति के आधार पर आगे बड़ा जाता है। यह दर्शनीय स्थल है। इसलिए ऊंट को रेगिस्तान का जहाज़ कहा जाता है|

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Thursday at 06:30 PM
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जैसलमेर

जैसलमेर का परिचय थार मरुस्थल के इतिहास मे अत्यंत प्राचीन रहा है। सूरज की स्वर्ण किरणें जब जैसलमेर की रेत पर गिरती है तो एक स्वर्गिक सुख का अनुभव देती है। बहती हवा के साथ जब रेतीले टीले अपनी जगह बदलते है तो एसा प्रतीत होता है मानो सौंदर्य के साथ सोना पिघल रहा हो। मरुस्थल में चलने वाले राहगीरों को यहाँ कुद्रत के अनेक करिश्मो मे से एक ‘मृग मरीचिका’ प्रभाव यहाँ देखने को मिलता है। जो एक अनुखा अनुभव है।
पूर्णिमा के दिन जनवरी या फ़रवरी के माह में 'मरुस्थल मेला' लगता है। इस मेले का सभी राजस्थानियों को पूरे साल इंतज़ार रहता है। जहा पर रोमांचक ऊंट नृत्य, ऊंट दौड़, ऊंट कलाबाजी, ऊंट सजावट प्रतियोगिता, पगड़ी बाँधने की प्रतियोगिता एवं श्री डेजर्ट प्रतियोगिता का समावेश होता है। यह रेत पर एक सच दिखाना होता है। एक ध्वनि और प्रकाश तमाशा का आयोजन किया जाता है जिसमे लोक कलाकार पूर्णिमा की रात सैम रेत टीलो पर शानदार प्रदर्शन करते है। निश्चित रूप से इस घटना को देखना न चूके।
यहाँ सोनार महल हे जो एक मात्र जीवित महल है मतलब यहाँ पर आज भी लोग वेसे ही रहते है जेसे वो पुराने जमाने मे रहा करते थे। रेतीले टीलो के बीच, ऊंट पर बैठकर एक जगह से दूसरी जगह तक जाते है। रात के समय मे बिना रोशनी के जाते है और सिर्फ़ चाँद और तारो की स्थिति के आधार पर आगे बड़ा जाता है। यह दर्शनीय स्थल है। इसलिए ऊंट को रेगिस्तान का जहाज़ कहा जाता है

Monica
Tuesday at 11:19 PM
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I've followed the progression of lessons (Beginner, Intermediate, and now onto Advanced Audio Blog) and am finding that the Audio Blog lessons have a *lot* of vocabulary that wasn't introduced in the previous lessons, to the point where I am using other resources to look up the definition of twenty to thirty words per lesson. Is there somewhere else to find these words? Or do I have to look them all up?