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Lesson Transcript

शोले
एक अविस्मरणीय कहानी जिसने डाकू गब्बर सिंह को कुप्रसिद्धि दिलाई, वो थी रमेश सिप्पी की शोले| 1975 में रिलीज़ हुई यह फिल्म भारतीय फिल्म जगत की एक विजयी व जुझारू कृति है| महान कलाकारों अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, धर्मेंद्र, जया भादुरी व संजीव कुमार अभिनीत इस फिल्म की मूल कहानी प्रतिभाशाली जोड़ी सलीम-जावेद ने लिखी थी| अमजद खान अपने गब्बर के किरदार व अपने एक संवाद ‘कितने आदमी थे?’ के लिए काफी प्रसिद्द हुए और यह संवाद आज भी हर पीढ़ी के प्रशंसकों द्वारा दोहराया जाता है| डाकू गब्बर का किरदार ग्वालियर के एक वास्तविक डाकू से प्रेरित था, जिसने 1950 के दशक में दहशत फैला रखी थी।
शोले की कहानी में एक सेवा निवृत्त पुलिस अफसर (संजीव कुमार) एक डाकू (खान) को काबू करने के लिए दो छोटे-मोटे चोरों ( बच्चन एवं धर्मेंद्र ) को काम पर रखता है| कुमार एक जमींदार व ठाकुर भी है, व भयभीत गाँव वालों को गब्बर के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए इन दोनों चोरों को मेहनताने पर रखता है| दोनों हालांकि बदमाश और चोर थे, परंतु उन्होंने डाकू के खिलाफ लड़ाई में अदम्य साहस व सम्मान का परिचय दिया| साथ ही दोनों इस दौरान क्रमशः जया के किरदार राधा व हेमा के किरदार बसंती के साथ प्रेम पाश में भी बंध गए| हेमा ने इस फिल्म में नाच-गाने के एक सुप्रसिद्ध आइटम नंबर ‘महबूबा महबूबा’ में अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया है|
शोले को नौ फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों के लिए नामित किया गया, परंतु अंत में यह फ़िल्म केवल सर्वश्रेष्ठ सम्पादन का पुरस्कार ही जीत पाई। इसके गीत प्रसिद्ध संगीतकार आर. डी. बर्मन ने लयबद्ध किए, परंतु इसकी असली लोकप्रियता इसके संवादों के कारण ही थी| प्रतिक्रिया स्वरूप, इसके संवादों के आडियो टेप को भी बाज़ार में उतारा गया|

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Thursday at 06:30 PM
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शोले

एक अविस्मरणीय कहानी जिसने डाकू गब्बर सिंह को कुप्रसिद्धि दिलाई, वो थी रमेश सिप्पी की शोले| 1975 में रिलीज़ हुई यह फिल्म भारतीय फिल्म जगत की एक विजयी व जुझारू कृति है| महान कलाकारों अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, धर्मेंद्र, जया भादुड़ी व संजीव कुमार अभिनीत इस फिल्म की मूल कहानी प्रतिभाशाली जोड़ी सलीम-जावेद ने लिखी थी| अमजद खान अपने गब्बर के किरदार व अपने एक संवाद ‘कितने आदमी थे?’ के लिए काफी प्रसिद्द हुए और यह संवाद आज भी हर पीढ़ी के प्रशंसकों द्वारा दोहराया जाता है| डाकू गब्बर का किरदार ग्वालियर के एक वास्तविक डाकू से प्रेरित था, जिसने 1950 के दशक में दहशत फैला रखी थी।

शोले की कहानी में एक सेवा निवृत्त पुलिस अफसर (संजीव कुमार) एक डाकू (खान) को काबू करने के लिए दो छोटे-मोटे चोरों ( बच्चन एवं धर्मेंद्र ) को काम पर रखता है| कुमार एक जमींदार व ठाकुर भी है, व भयभीत गाँव वालों को गब्बर के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए इन दोनों चोरों को मेहनताने पर रखता है| दोनों हालांकि बदमाश और चोर थे, परंतु उन्होंने डाकू के खिलाफ लड़ाई में अदम्य साहस व सम्मान का परिचय दिया| साथ ही दोनों इस दौरान क्रमशः जया के किरदार राधा व हेमा के किरदार बसंती के साथ प्रेम पाश में भी बंध गए| हेमा ने इस फिल्म में नाच-गाने के एक सुप्रसिद्ध आइटम नंबर ‘महबूबा महबूबा’ में अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया है|

शोले को नौ फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों के लिए नामित किया गया, परंतु अंत में यह फ़िल्म केवल सर्वश्रेष्ठ सम्पादन का पुरस्कार ही जीत पाई। इसके गीत प्रसिद्ध संगीतकार आर. डी. बर्मन ने लयबद्ध किए, परंतु इसकी असली लोकप्रियता इसके संवादों के कारण ही थी| प्रतिक्रिया स्वरूप, इसके संवादों के आडियो टेप को भी बाज़ार में उतारा गया|

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नमस्ते (Namaste) Lety Perez,


Thank you so much for your positive message! 😇❤️️

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We wish you good luck with your language studies.


Kind regards,

लेवेन्टे (Levente)

Team HindiPod101.com

Lety Perez
Monday at 10:08 PM
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I like it very much