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Lesson Transcript

चंद्रगुप्त मौर्य
भारत के प्रथम सम्राट, चंद्रगुप्त मौर्य, ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी जिसने 321 से 185 ईसा पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से में शासन किया| वे ना केवल युद्ध और रणनीति में अपने कौशल बल्कि उस स्थिरता के लिए भी प्रसिद्ध हैं जो उन्होंने भारत में स्थापित की| उनके साम्राज्य के अंतर्गत व्यापार और कृषि की उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ जटिल प्रशासनिक व्यवस्था भी विकसित हुई|
उनका जन्म पाटलिपुत्र में हुआ था जो आधुनिक समय में बिहार का पटना शहर है| चंद्रगुप्त की मूल बातों या उनके प्रारंभिक जीवन के बारे में बहुत ही कम दस्तावेजी विवरण मौजूद हैं| कुछ दस्तावेज उन्हें कुलीन या शाही वर्ग के एक सदस्य के रूप में बताते हैं जबकि अन्य उनकी साधारण पृष्ठभूमि और बाद में सम्राट के रूप में उत्थान का वर्णन करते हैं| यह तय है कि वे एक कुशल रणनीतिकार थे और 20 वर्ष की उम्र में नंदा साम्राज्य के स्थापित विजेता बने थे| उन्होंने सिकंदर के उत्तराधिकारियों को वर्तमान समय के पाकिस्तान में खदेड़ दिया था और सेल्यूकस प्रथम निकेटर के साथ लड़ाई लड़ी थी| उनका संघर्ष भारत-यूनानी संधियों की स्थापना और सेल्यूकस के पश्चिमी कब्जे वाले भागों पर चंद्रगुप्त के कब्जे के साथ हुआ था| उनका वर्णन कई यूनानी दस्तावेजों में मिलता है और उन्हें यूनानी नामों सैंड्रोकिप्टस और एंड्रोकोटस से जाना जाता है|
चंद्रगुप्त ने अपना अधिकांश वयस्क जीवन अपने साम्राज्य के विस्तार में बिताया, और अफगानिस्तान से लेकर बंगाल तक और नेपाल से लेकर दक्खन के पठार तक अपना नियंत्रण कायम करने तक थमे नहीं| अंततः उन्होंने अपने बेटे बिंदुसार को अपना सिंहासन सौंप दिया और अपने शाही जीवन को त्याग कर एक जैन तपस्वी बन गए| उन्होंने अपने अंतिम दिन अपने गुरू, जैन संत भद्रबाहु के साथ एक गुफा में ध्यान करते हुए गुजार दिए| बताया जाता है कि जब चंद्रगुप्त की मृत्यु हुई उस समय वे 42 वर्ष के थे| बिंदुसार के नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य का विस्तार दक्षिण की ओर जारी रहा और यह चन्द्रगुप्त के पोते, अशोक महान के विजय अभियानों से अपने चरम तक पहुंचा|

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Thursday at 06:30 PM
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चंद्रगुप्त मौर्य

भारत के प्रथम सम्राट, चंद्रगुप्त मौर्य, ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी जिसने 321 से 185 ईसा पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से में शासन किया| वे ना केवल युद्ध और रणनीति में अपने कौशल बल्कि उस स्थिरता के लिए भी प्रसिद्ध हैं जो उन्होंने भारत में स्थापित की| उनके साम्राज्य के अंतर्गत व्यापार और कृषि की उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ जटिल प्रशासनिक व्यवस्था भी विकसित हुई|

उनका जन्म पाटलिपुत्र में हुआ था जो आधुनिक समय में बिहार का पटना शहर है| चंद्रगुप्त की मूल बातों या उनके प्रारंभिक जीवन के बारे में बहुत ही कम दस्तावेजी विवरण मौजूद हैं| कुछ दस्तावेज उन्हें कुलीन या शाही वर्ग के एक सदस्य के रूप में बताते हैं जबकि अन्य उनकी साधारण पृष्ठभूमि और बाद में सम्राट के रूप में उत्थान का वर्णन करते हैं| यह तय है कि वे एक कुशल रणनीतिकार थे और 20 वर्ष की उम्र में नंदा साम्राज्य के स्थापित विजेता बने थे| उन्होंने सिकंदर के उत्तराधिकारियों को वर्तमान समय के पाकिस्तान में खदेड़ दिया था और सेल्यूकस प्रथम निकेटर के साथ लड़ाई लड़ी थी| उनका संघर्ष भारत-यूनानी संधियों की स्थापना और सेल्यूकस के पश्चिमी कब्जे वाले भागों पर चंद्रगुप्त के कब्जे साथ हुआ था| उनका वर्णन कई यूनानी दस्तावेजों में मिलता है और उन्हें यूनानी नामों सैंड्रोकिप्टस और एंड्रोकोटस से जाना जाता है|

चंद्रगुप्त ने अपना अधिकांश वयस्क जीवन अपने साम्राज्य के विस्तार में बिताया, और अफगानिस्तान से लेकर बंगाल तक और नेपाल से लेकर दक्खन के पठार तक अपना नियंत्रण कायम करने तक थमे नहीं| अंततः उन्होंने अपने बेटे बिंदुसार को अपना सिंहासन सौंप दिया और अपने शाही जीवन को त्याग कर एक जैन तपस्वी बन गए| उन्होंने अपने अंतिम दिन अपने गुरू, जैन संत भद्रबाहु के साथ एक गुफा में ध्यान करते हुए गुजार दिए| बताया जाता है कि जब चंद्रगुप्त की मृत्यु हुई उस समय वे 42 वर्ष के थे| बिंदुसार के नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य का विस्तार दक्षिण की ओर जारी रहा और यह चन्द्रगुप्त के पोते, अशोक महान के विजय अभियानों से अपने चरम तक पहुंचा|