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Lesson Transcript

अशोका महान
सम्राट अशोका जिन्हें अशोक के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, इन्हें भारत के महानतम सम्राटों में से एक माना जाता है| इनका संबंध शासकों के मौर्य वंश से था जिसकी स्थापना लगभग 322 ईसा पूर्व में उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी| अशोक ने भारतीय उपमहाद्वीप में मौर्य साम्राज्य का विस्तार इसकी अधिकतम सीमा तक किया और अपने दादा की तरह बाद में अशोक के जीवन में एक आध्यात्मिक परिवर्तन आया| वे महान मौर्य शासकों के कड़ी में अंतिम सम्राट थे; यह साम्राज्य उनकी मृत्यु के बाद आए निष्प्रभावी शासकों की जमात के परिणाम स्वरूप केवल लगभग 50 वर्षों तक अस्तित्व में रहा|
एक समय मौर्य साम्राज्य अपने समय के सबसे घनी आबादी वाले साम्राज्यों में से एक था जो 5 से 6 करोड़ से अधिक लोगों पर शासन करता था| बिन्दुसार के बेटे अशोका का जन्म अशोकवर्धन मौर्य के रूप में 304 ईसा पूर्व में हुआ था| वे एक प्रखर योद्धा थे और अपनी युवावस्था में उन्होंने तक्षशिला (पश्चिमी पाकिस्तान) और उज्जैन (उत्तर मध्य भारत) में विद्रोहियों को कुचल डाला था| हालांकि उनके साम्राज्य के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र काफी सुव्यवस्थित थे, उन्होंने भारत के दक्षिण और पूर्व में मौर्य शासन का फिर से विस्तार किया| कलिंग की विजय के दौरान उनमें एक निर्णायक परिवर्तन आया| इस अभियान के दौरान एक अनुमान के मुताबिक़ 1,00,000 सैनिक और नागरिक मारे गए थे| उनके पक्ष को लगभग 10,000 लोगों का नुकसान उठाना पड़ा था| युद्ध के परिणामों को करीब से देखने का यह उनका पहला अनुभव था जब वे मृत शरीरों से पटे युद्ध के मैदान पर चल रहे थे और लोगों पर हुए क्रूर परिणामों को देख रहे थे; इसके साथ ही अशोक हमेशा के लिए बदल गए| उन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को अपनाया और एक ऐसा साम्राज्य बनाने में जुट गए जो शांति, सम्मान एवं समृद्धि से परिपूर्ण हो|
बाद के वर्षों में मौर्य साम्राज्य में शांति और उन्नति का फूल खिलते देखा गया| अशोका ने अहिंसा (हिंसा-रहित) और समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक साम्राज्य की स्थापना की| उनके फैसलों और सिद्धांतों को अशोक के सुप्रसिद्ध शिलालेखों पर खुदा हुआ पाया जा सकता है जो संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हैं| बौद्ध धर्म को 260 ईसा पूर्व में राज्य धर्म के रूप में पेश किया गया था और राजा के कानून के तहत हर किसी को संरक्षण प्राप्त था| उन्होंने खेल-खेल में शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया, शाकाहार को बढ़ावा दिया और विश्वविद्यालयों का निर्माण कराया| उनके शासन-काल में सारी प्रजा के साथ समानता और सम्मानपूर्ण व्यवहार किया जाता था, उनकी जाति, धार्मिक विश्वास या जातीय पृष्ठभूमि चाहे कुछ भी हो| उन्होंने बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया, पड़ोसी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण गठबंधन स्थापित किया और सभी जीवित प्राणियों के लिए मानवीय आचरण को बढ़ावा दिया| 250 ईसा पूर्व में उन्होंने बौद्ध दूतों को आसपास के देशों में भेजना शुरू किया, उन्हें दक्षिण पूर्व एशिया, श्रीलंका, पश्चिमी एशिया और भूमध्य क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रसार का श्रेय दिया जाता है| अशोका महान के नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य ने शांति और विकास की एक अभूतपूर्व अर्द्धशताब्दी का अनुभव किया| आज का आधुनिक भारत विभिन्न तरीकों से अशोक को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिसमें अशोका के शेर चिह्न को एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाना शामिल है|

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अशोका महान

सम्राट अशोका जिन्हें अशोक के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, इन्हें भारत के महानतम सम्राटों में से एक माना जाता है| इनका संबंध शासकों के मौर्य वंश से था जिसकी स्थापना लगभग 322 ईसा पूर्व में उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी| अशोक ने भारतीय उपमहाद्वीप में मौर्य साम्राज्य का विस्तार इसकी अधिकतम सीमा तक किया और अपने दादा की तरह बाद में अशोक के जीवन में एक आध्यात्मिक परिवर्तन आया| वे महान मौर्य शासकों के कड़ी में अंतिम सम्राट थे; यह साम्राज्य उनकी मृत्यु के बाद आए निष्प्रभावी शासकों की जमात के परिणाम स्वरूप केवल लगभग 50 वर्षों तक अस्तित्व में रहा|
 
एक समय मौर्य साम्राज्य अपने समय के सबसे घनी आबादी वाले साम्राज्यों में से एक था जो 5 से 6 करोड़ से अधिक लोगों पर शासन करता था| बिन्दुसार के बेटे अशोका का जन्म अशोकवर्धन मौर्य के रूप में 304 ईसा पूर्व में हुआ था| वे एक प्रखर योद्धा थे और अपनी युवावस्था में उन्होंने तक्षशिला (पश्चिमी पाकिस्तान) और उज्जैन (उत्तर मध्य भारत) में विद्रोहियों को कुचल डाला था| हालांकि उनके साम्राज्य के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र काफी सुव्यवस्थित थे, उन्होंने भारत के दक्षिण और पूर्व में मौर्य शासन का फिर से विस्तार किया| कलिंग की विजय के दौरान उनमें एक निर्णायक परिवर्तन आया| इस अभियान के दौरान एक अनुमान के मुताबिक़ 1,00,000 सैनिक और नागरिक मारे गए थे| उनके पक्ष को लगभग 10,000 लोगों का नुकसान उठाना पड़ा था| युद्ध के परिणामों को करीब से देखने का यह उनका पहला अनुभव था जब वे मृत शरीरों से पटे युद्ध के मैदान पर चल रहे थे और लोगों पर हुए क्रूर परिणामों को देख रहे थे; इसके साथ ही अशोक हमेशा के लिए बदल गए| उन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को अपनाया और एक ऐसा साम्राज्य बनाने में जुट गए जो शांति, सम्मान एवं समृद्धि से परिपूर्ण हो|
 
बाद के वर्षों में मौर्य साम्राज्य में शांति और उन्नति का फूल खिलते देखा गया| अशोका ने अहिंसा (हिंसा-रहित) और समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक साम्राज्य की स्थापना की| उनके फैसलों और सिद्धांतों को अशोक के सुप्रसिद्ध शिलालेखों पर खुदा हुआ पाया जा सकता है जो संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हैं| बौद्ध धर्म को 260 ईसा पूर्व में राज्य धर्म के रूप में पेश किया गया था और राजा के कानून के तहत हर किसी को संरक्षण प्राप्त था| उन्होंने खेल-खेल में शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया, शाकाहार को बढ़ावा दिया और विश्वविद्यालयों का निर्माण कराया| उनके शासन-काल में सारी प्रजा के साथ समानता और सम्मानपूर्ण व्यवहार किया जाता था, उनकी जाति, धार्मिक विश्वास या जातीय पृष्ठभूमि चाहे कुछ भी हो| उन्होंने बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया, पड़ोसी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण गठबंधन स्थापित किया और सभी जीवित प्राणियों के लिए मानवीय आचरण को बढ़ावा दिया| 250 ईसा पूर्व में उन्होंने बौद्ध दूतों को आसपास के देशों में भेजना शुरू किया, उन्हें दक्षिण पूर्व एशिया, श्रीलंका, पश्चिमी एशिया और भूमध्य क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रसार का श्रेय दिया जाता है| अशोका महान के नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य ने शांति और विकास की एक अभूतपूर्व अर्द्धशताब्दी का अनुभव किया| आज का आधुनिक भारत विभिन्न तरीकों से अशोक को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिसमें अशोका के शेर चिह्न को एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाना शामिल है|