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Lesson Transcript

चंद्रगुप्त द्वितीय
हालांकि इनका नाम मौर्य साम्राज्य के संस्थापक के साथ जुड़ा हुआ है, चन्द्रगुप्त द्वितीय ने एक अन्य सुप्रसिद्ध प्राचीन भारतीय साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य की स्थापना की थी| गुप्त साम्राज्य को भारत के स्वर्ण युग के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है, चंद्रगुप्त द्वितीय ने इसकी चरम अवस्था के दौरान 375 से लेकर लगभग 415 सी ई तक शासन किया| उनकी राजधानी पाटलिपुत्र में स्थापित की गयी थी और उज्जैन को द्वितीय राजधानी बनाया गया था| उनके शासनकाल के दौरान साम्राज्य मुख्य रूप से उत्तरी भारत में स्थित था जो सिंधु नदी से लेकर नर्मदा नदी तक फैला हुआ था| समय के साथ गुप्त वंश उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से में फैल गया था जिसमें मौर्य साम्राज्य का काफी बड़ा हिस्सा शामिल था|
गुप्त साम्राज्य को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला और कला के क्षेत्र में प्रगति के लिए जाना जाता था| कालिदास, वात्स्यायन, वराहमिहिर, विष्णु शर्मा और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वान इस साम्राज्य के दौरान ही उभरे थे| उन्नत धातु विज्ञान का विकास इसी अवधि के दौरान हुआ था जब भारत में इस्पात के एक अद्वितीय और सुप्रतिष्ठित प्रकार, वूट्ज़ स्टील का उत्पादन किया गया था| शून्य, आधार 10, शतरंज और ब्रह्मांड के सौर केंद्रित सिद्धांत जैसी अद्भुत अवधारणाएं इसी अवधि में विकसित हुईं| नए प्रकार के चिकित्सा उपकरणों, आयुर्वेदिक चिकित्सा और उन्नत शल्य चिकित्सा का विकास भी गुप्त साम्राज्य के अंतर्गत हुआ था| खगोल विज्ञान में प्रगति सहित भारतीय विचारधाराओं का प्रसार गुप्त वंश के व्यापारिक संबंधों के माध्यम से हुआ था| श्रीलंका, बर्मा, हिन्द-चीन और मलय द्वीपसमूह के साथ भारत के मजबूत व्यापारिक संबंध थे|
हालांकि चंद्रगुप्त द्वितीय सहित गुप्त साम्राज्य के शासक हिंदू थे, उनके शासन के अंतर्गत जैन और बौद्ध संस्कृतियों को समर्थन प्राप्त था| गुप्तकालीन कला सभी तीन धार्मिक शैलियों की ललित कला के नमूनों का प्रदर्शन करती है और सुप्रसिद्ध कामसूत्र (प्रेम की कहानी) भी इसी अवधि में लिखी गयी थी| चन्द्रगुप्त द्वितीय एक योद्धा-सम्राट थे और उनकी सबसे बड़ी जीत शक-क्षत्रप राजवंश के विरुद्ध थी जिसमें उनकी गुजरात में पकड़ कमजोर कर दी| उन्होंने पश्चिमी और पूर्वी ओक्सस घाटियों में फारसियों, हूणों और कम्बोज जनजातियों पर विजय प्राप्त की| उनका उत्तराधिकार उनके बेटे कुमारगुप्त प्रथम ने संभाला जिन्होंने 455 ईस्वी तक शासन किया|

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चंद्रगुप्त द्वितीय

हालांकि इनका नाम मौर्य साम्राज्य के संस्थापक के साथ जुड़ा हुआ है, चन्द्रगुप्त द्वितीय ने एक अन्य सुप्रसिद्ध प्राचीन भारतीय साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य की स्थापना की थी| गुप्त साम्राज्य को भारत के स्वर्ण युग के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है, चंद्रगुप्त द्वितीय ने इसकी चरम अवस्था के दौरान 375 से लेकर लगभग 415 सीई तक शासन किया| उनकी राजधानी पाटलिपुत्र में स्थापित की गयी थी और उज्जैन को द्वितीय राजधानी बनाया गया था|उनके शासनकाल के दौरान साम्राज्य मुख्य रूप से उत्तरी भारत में स्थित था जो सिंधु नदी से लेकर नर्मदा नदी तक फैला हुआ था| समय के साथ गुप्त वंश उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से में फैल गया था जिसमें मौर्य साम्राज्य का काफी बड़ा हिस्सा शामिल था|
 
गुप्त साम्राज्य को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला और कला के क्षेत्र में प्रगति के लिए जाना जाता था| कालिदास, वात्स्यायन, वराहमिहिर, विष्णु शर्मा और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वान इस साम्राज्य के दौरान ही उभरे थे| उन्नत धातु विज्ञान का विकास इसी अवधि के दौरान हुआ था जब भारत में इस्पात के एक अद्वितीय और सुप्रतिष्ठित प्रकार, वूट्ज़ स्टील का उत्पादन किया गया था| शून्य, आधार 10, शतरंज और ब्रह्मांड के सौर केंद्रित सिद्धांत जैसी अद्भुत अवधारणाएं इसी अवधि में विकसित हुईं| नए प्रकार के चिकित्सा उपकरणों, आयुर्वेदिक चिकित्सा और उन्नत शल्य चिकित्सा का विकास भी गुप्त साम्राज्य के अंतर्गत हुआ था| खगोल विज्ञान में प्रगति सहित भारतीय विचारधाराओं का प्रसार गुप्त वंश के व्यापारिक संबंधों के माध्यम से हुआ था| श्रीलंका, बर्मा, हिन्द-चीन और मलय द्वीपसमूह के साथ भारत के मजबूत व्यापारिक संबंध थे|
 
हालांकि चंद्रगुप्त द्वितीय सहित गुप्त साम्राज्य के शासक हिंदू थे, उनके शासन के अंतर्गत जैन और बौद्ध संस्कृतियों को समर्थन प्राप्त था| गुप्तकालीन कला सभी तीन धार्मिक शैलियों की ललित कला के नमूनों का प्रदर्शन करती है और सुप्रसिद्ध कामसूत्र (प्रेम की कहानी) भी इसी अवधि में लिखी गयी थी| चन्द्रगुप्त द्वितीय एक योद्धा-सम्राट थे और उनकी सबसे बड़ी जीत शक-क्षत्रप राजवंश के विरुद्ध थी जिसमें उन्होंने गुजरात में उनकी पकड़ कमजोर कर दी| उन्होंने पश्चिमी और पूर्वी ओक्सस घाटियों में फारसियों, हूणों और कम्बोज जनजातियों पर विजय प्राप्त की| उनका उत्तराधिकार उनके बेटे कुमारगुप्त प्रथम ने संभाला जिन्होंने 455 ईस्वी तक शासन किया|