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Lesson Transcript

रणजीत सिंह
सिख महाराजा (राजा) रणजीत सिंह द्वारा आधुनिक समय के भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में 1801 में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का गठन किया गया था| एक दुर्जेय और दयालु शासक रणजीत सिंह ने पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत से लेकर कश्मीर एवं जम्मू तक फैले क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था| उन्हें अपने साम्राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जाना जाता था और उनकी सरकार के भीतर सत्ता के उच्च पदों तक आने के लिए धर्म कोई रुकावट नहीं था| उन्होंने सुप्रसिद्ध हरमंदिर साहिब यानी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर सजी संगमरमर और स्वर्ण की कलाकृतियों का निर्माण करवाया|
वर्तमान समय के पाकिस्तान में स्थित गुजरांवाला में जन्मे रणजीत सिंह को संभवतः बचपन में चेचक के कारण अपनी एक आँख गंवानी पड़ी थी लेकिन उन्होंने एक दुर्जेय सैन्य कमांडर बनने में सफलता प्राप्त की, 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने विजय अभियानों और सिख साम्राज्य की स्थापना की शुरुआत कर दी थी| उनकी राजधानी पहले गुजरांवाला में स्थापित की गयी थी लेकिन फिर महाराजा के रूप में अपनी ताजपोशी के बाद उन्होंने इसे लाहौर स्थानांतरित कर दिया|
रणजीत सिंह ने यूरोपीय मिशनरियों सहित विभिन्न पृष्ठभूमि के अनेक प्रकार के कौशल से युक्त लोगों का लाभ उठाया| दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटों के बीच सत्ता संघर्ष उनके साम्राज्य के पतन और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया ट्रेडिंग कंपनी द्वारा सत्तारूढ़ शक्ति के विलय का कारण बना| उनके वंशज साम्राज्य का वास्तविक नियंत्रण फिर कभी हासिल नहीं कर पाए और कई लोगों की मृत्यु पंजाब से दूर, इंग्लैंड में निर्वासित रहते हो गई| रणजीत सिंह सुविख्यात कोहिनूर हीरे के अंतिम भारतीय स्वामी थे जिसे अपनी मृत्युशय्या पर रहते उन्होंने उड़ीसा में एक मंदिर को देने का संकल्प लिया था| इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा जब्त कर महारानी विक्टोरिया को प्रस्तुत किया गया था| अब यह ब्रिटिश क्राउन के रत्न संग्रह के हिस्से के रूप में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के कब्जे में है|

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रणजीत सिंह

सिख महाराजा (रजा) रणजीत सिंह द्वारा आधुनिक समय के भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में 1801 में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का गठन किया गया था| एक दुर्जेय और दयालु शासक रणजीत सिंह ने पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत से लेकर कश्मीर एवं जम्मू तक फैले क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था| उन्हें अपने साम्राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जाना जाता था और उनकी सरकार के भीतर सत्ता के उच्च पदों तक आने के लिए धर्म कोई रुकावट नहीं था| उन्होंने सुप्रसिद्ध हरमंदिर साहिब यानी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर सजी संगमरमर और स्वर्ण की कलाकृतियों का निर्माण करवाया|
 
वर्तमान समय के पाकिस्तान में स्थित गुजरांवाला में जन्मे रणजीत सिंह को संभवतः बचपन में चेचक के कारण अपनी एक आँख गंवानी पड़ी थी लेकिन उन्होंने एक दुर्जेय सैन्य कमांडर बनने में सफलता प्राप्त की, 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने विजय अभियानों और सिख साम्राज्य की स्थापना की शुरुआत कर दी थी| उनकी राजधानी पहले गुजरांवाला में स्थापित की गयी थी लेकिन फिर महाराजा के रूप में अपनी ताजपोशी के बाद उन्होंने इसे लाहौर स्थानांतरित कर दिया|
 
रणजीत सिंह ने यूरोपीय मिशनरियों सहित विभिन्न पृष्ठभूमि के अनेक प्रकार के कौशल से युक्त लोगों का लाभ उठाया| दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटों के बीच सत्ता संघर्ष उनके साम्राज्य के पतन और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया ट्रेडिंग कंपनी द्वारा सत्तारूढ़ शक्ति के विलय का कारण बना| उनके वंशज साम्राज्य का वास्तविक नियंत्रण फिर कभी हासिल नहीं कर पाए और कई लोगों की मृत्यु पंजाब से दूर, इंग्लैंड में निर्वासित रहते हो गई| रणजीत सिंह सुविख्यात कोहिनूर हीरे के अंतिम भारतीय स्वामी थे जिसे अपनी मृत्युशय्या पर रहते उन्होंने उड़ीसा में एक मंदिर को देने का संकल्प लिया था| इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा जब्त कर महारानी विक्टोरिया को प्रस्तुत किया गया था| अब यह ब्रिटिश क्राउन के रत्न संग्रह के हिस्से के रूप में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के कब्जे में है|